बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने दिया इस्तीफा, JDU को मिल सकती है सभापति की कुर्सी
पटना। बिहार विधान परिषद की राजनीति में सोमवार को बड़ा बदलाव देखने को मिला। विधान परिषद के सभापति और भाजपा के वरिष्ठ नेता अवधेश नारायण सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना इस्तीफा उपसभापति प्रो. डॉ. रामवचन राय को सौंपा। इस्तीफे के बाद रामवचन राय ने कार्यकारी सभापति की जिम्मेदारी संभाल ली है।
रिपोर्टों के मुताबिक, बिहार में सत्ता के नए समीकरण और NDA के भीतर महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों के बंटवारे को इस बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है। विधान परिषद के सभापति का पद JDU को दिए जाने की संभावना पहले से चर्चा में थी। अब अवधेश नारायण सिंह के इस्तीफे के बाद इस संभावना को और बल मिला है।
‘किसी से कोई गिला-शिकवा नहीं’
इस्तीफा देने के बाद अवधेश नारायण सिंह ने कहा कि उन्होंने करीब 33 वर्षों तक लगातार विधान परिषद के सदस्य के रूप में काम किया है। उन्होंने कहा कि वह आगे भी सदस्य के रूप में सदन में सक्रिय भूमिका निभाते रहेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें पार्टी की ओर से बड़ा अवसर मिला और किसी से कोई गिला-शिकवा नहीं है। पार्टी उनके भविष्य को ध्यान में रखकर जो फैसला करेगी, वह उसका पालन करेंगे।
अवधेश नारायण सिंह ने विधान परिषद में अपने कार्यकाल के दौरान मिले सदस्यों के सहयोग और स्नेह के लिए आभार जताया। उन्होंने परिषद के कर्मचारियों को परिवार की तरह मानने की बात भी कही।
रामवचन राय का नाम चर्चा में
अवधेश नारायण सिंह के इस्तीफे के बाद JDU के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपसभापति प्रो. रामवचन राय का नाम अगले सभापति के लिए प्रमुखता से चर्चा में है। फिलहाल वे कार्यकारी सभापति की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। हालांकि, नए सभापति के चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।
NDA में सत्ता संतुलन से जोड़कर देखा जा रहा बदलाव
बिहार में नई सरकार के गठन के बाद भाजपा और JDU के बीच महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों को लेकर सत्ता संतुलन की चर्चा होती रही है। रिपोर्टों के अनुसार मुख्यमंत्री पद और विधानसभा अध्यक्ष का पद भाजपा के पास होने के बीच विधान परिषद के सभापति का पद JDU को देने की व्यवस्था पर सहमति बनने की बात सामने आई थी।
हालांकि, JDU की आंतरिक राजनीति या किसी विशेष नेता द्वारा दबाव बनाए जाने की बातों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए इन्हें फिलहाल सूत्रों/राजनीतिक चर्चाओं के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
33 साल का संसदीय सफर
अवधेश नारायण सिंह लंबे समय से बिहार विधान परिषद की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। उन्होंने अलग-अलग समय पर सभापति और कार्यकारी सभापति की जिम्मेदारी भी संभाली। ताजा इस्तीफे के बाद वह विधान परिषद के सदस्य बने रहेंगे।
बिहार विधान परिषद में अब नए सभापति के चुनाव को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। फिलहाल रामवचन राय कार्यकारी सभापति के रूप में सदन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।







