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कथा सागर

कथा सागर

अपने मन की खाल को उतारो यानि उसका मुकाबला करो | हर समय उसके हुक्म से परहेज़ करो यानि उसका नौकर मत बनो| मन ने हर समय अनेक कामनाएँ धारण कर रखी हैं और संसारी तरंगों में लिपाएमान है | हे जीव इसका कभी साथ ना दो| बल्कि इसकी निगरानी करो, अगर ये तुम्हारे कार्य में विघन डाले तो तुम उसके कार्य में विघन डालो| ऐसा अमर देश का फ़रमान है|

जो जीव़ अपनी औलाद की सेवा में लगे रहते हैं और लोक सेवा की तरफ़ राग़ब नहीं होते उनको आखिर तज़रबा होता है कि उनकी औलाद उनके एहसान फ़रामोश कर देती है| अगर किसी दूसरे जीव पर अहसान किया...
न्यूटन का एक पालतू कुत्ता था  - डायमंड | हालाँकि वह बहुत शरारती था , पर न्यूटन का दुलारा था | एक रात डायमंड घर पर अकेला था | न जाने उसे क्या सूझी ! अपने मालिक की स्टडी...
छोटी-सी बच्ची पिंकी, आज बहुत खुश है |  क्योंकि हर साल की तरह आज भी वह अपने बाबोसा (पिताजी) के संग पुष्कर मेले में जाने के लिए तैयार हो रही है |  असल में, पिंकी 'नट' समुदाय से सम्बन्ध ...
मनुष्य अपने जीवन पर गौर करे, तो देखने में आता है कि जीवन चल रहा है, पर उसमें वह आनंद नहीं है| कभी-कभी वह अभिषाप जैसा लगता है| जीवन पर सत्य का असर बहुत कम दिखता है, पाखण्ड का...
अर्थवसु महात्मा बुद्ध का शिष्य था | वह बहुत धनी था, पर बेहद कंजूस भी था | न खुद ज्यादा खर्चता था, न अपने बच्चों को खर्चने देता था | जितना बहुत ज़रूरी होता था, बस उतना ही खर्चा...
एक बार संत कबीर ने बड़ी कुशलता से एक पगड़ी बनाई | झीना-झीना कपड़ा बुना और उसे गोलाई में लपेटा | हो गई पगड़ी तैयार ! वह पगड़ी जिसे हर कोई बड़ी शान से अपने सिर पर सजाता है...
गुरूओं ने सही रास्ता बतलाया और खुद उस रास्ते पर चलकर कामयाबी हासिल करके जनता को रास्ता दिखलाया और उन्होनें बतलाया कि ईश्वर को वह समझ सकता है जिसके अन्दर खलकत का प्रेम है| हर एक जीव चाहता है...
पापा पापा मुझे चोट लग गई खून आ रहा है5 साल के बच्चे के मुँह से सुनना था कि पापा सब कुछ छोड़ छाड़ कर गोदी में उठा उठा कर 1 किलो मीटर की दुरी पर क्लिनिक तक भागकर...
तक्षशिला - भारत का प्राचीन व महान शिक्षा-केन्द्र ! देश-विदेश से विद्यार्थी यहाँ शिक्षा प्राप्त करने आते थे | पूरे विश्व में तक्षशिला के नाम का डंका बजा करता था | उस दिन तक्षशिला में दीक्षांत समारोह था | उपाधि...
मन को एक विचार पर रोकने और केन्द्रित रखने को एकाग्रता और विचारों से रहित कर देने को ध्यान कहते हैं| आत्मा स्वयं शरीर से काम नहीं कराती बल्कि आत्मा की शक्ति से ये मन ही शरीर से काम...

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