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कथा सागर

कथा सागर

अपने मन की खाल को उतारो यानि उसका मुकाबला करो | हर समय उसके हुक्म से परहेज़ करो यानि उसका नौकर मत बनो| मन ने हर समय अनेक कामनाएँ धारण कर रखी हैं और संसारी तरंगों में लिपाएमान है | हे जीव इसका कभी साथ ना दो| बल्कि इसकी निगरानी करो, अगर ये तुम्हारे कार्य में विघन डाले तो तुम उसके कार्य में विघन डालो| ऐसा अमर देश का फ़रमान है|

महान उद्देश्य के लिए गुरूओं ने कुर्बानियाँ दीं | सिक्ख इतिहास इन कुर्बानियों का साक्षी है | बात उस समय की है, जब नवम पातशाह श्री गुरू तेग बहादुर जी ने समाज को मुगलों के अत्याचार से मुक्त कराने...
असावधानी नुकसानदेह हो सकती है | एक राजा बहुत ही सदाचारी, प्रजापालक व स्वभाव से ही धर्मात्मा था | उसका एक पुत्र भी था | वह भी अपने पिता की भाँति सुशील, गुणवान, मधुरभाषी, पराक्रमी व आज्ञाकारी था | एक दिन...
तक्षशिला - भारत का प्राचीन व महान शिक्षा-केन्द्र ! देश-विदेश से विद्यार्थी यहाँ शिक्षा प्राप्त करने आते थे | पूरे विश्व में तक्षशिला के नाम का डंका बजा करता था | उस दिन तक्षशिला में दीक्षांत समारोह था | उपाधि...
न्यूटन का एक पालतू कुत्ता था  - डायमंड | हालाँकि वह बहुत शरारती था , पर न्यूटन का दुलारा था | एक रात डायमंड घर पर अकेला था | न जाने उसे क्या सूझी ! अपने मालिक की स्टडी...
गुरूओं ने सही रास्ता बतलाया और खुद उस रास्ते पर चलकर कामयाबी हासिल करके जनता को रास्ता दिखलाया और उन्होनें बतलाया कि ईश्वर को वह समझ सकता है जिसके अन्दर खलकत का प्रेम है| हर एक जीव चाहता है...
रामकिशोर वर्मा जी उम्र के आखिरी पड़ाव से गुज़र रहे थे |  उनके ३ पुत्र थे |  एक दिन उनके मन में विचार आया कि क्यों न जीवन के अंतिम चरण में अपने पुत्रों को कोई ऐसी सीख दूँ,...
पापा पापा मुझे चोट लग गई खून आ रहा है5 साल के बच्चे के मुँह से सुनना था कि पापा सब कुछ छोड़ छाड़ कर गोदी में उठा उठा कर 1 किलो मीटर की दुरी पर क्लिनिक तक भागकर...
छोटी-सी बच्ची पिंकी, आज बहुत खुश है |  क्योंकि हर साल की तरह आज भी वह अपने बाबोसा (पिताजी) के संग पुष्कर मेले में जाने के लिए तैयार हो रही है |  असल में, पिंकी 'नट' समुदाय से सम्बन्ध ...
| | गुरू-दक्षिणा  | | प्राचीनकाल के एक गुरु अपने आश्रम को लेकर बहुत चिंतित थे। गुरु वृद्ध हो चले थे और अब शेष जीवन हिमालय में ही बिताना चाहते थे, लेकिन उन्हें यह चिंता सताए जा रही थी कि...
जो जीव़ अपनी औलाद की सेवा में लगे रहते हैं और लोक सेवा की तरफ़ राग़ब नहीं होते उनको आखिर तज़रबा होता है कि उनकी औलाद उनके एहसान फ़रामोश कर देती है| अगर किसी दूसरे जीव पर अहसान किया...

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