Home हिन्दी कथा सागर

कथा सागर

कथा सागर

अपने मन की खाल को उतारो यानि उसका मुकाबला करो | हर समय उसके हुक्म से परहेज़ करो यानि उसका नौकर मत बनो| मन ने हर समय अनेक कामनाएँ धारण कर रखी हैं और संसारी तरंगों में लिपाएमान है | हे जीव इसका कभी साथ ना दो| बल्कि इसकी निगरानी करो, अगर ये तुम्हारे कार्य में विघन डाले तो तुम उसके कार्य में विघन डालो| ऐसा अमर देश का फ़रमान है|

छोटी-सी बच्ची पिंकी, आज बहुत खुश है |  क्योंकि हर साल की तरह आज भी वह अपने बाबोसा (पिताजी) के संग पुष्कर मेले में जाने के लिए तैयार हो रही है |  असल में, पिंकी 'नट' समुदाय से सम्बन्ध ...
रामकिशोर वर्मा जी उम्र के आखिरी पड़ाव से गुज़र रहे थे |  उनके ३ पुत्र थे |  एक दिन उनके मन में विचार आया कि क्यों न जीवन के अंतिम चरण में अपने पुत्रों को कोई ऐसी सीख दूँ,...
तक्षशिला - भारत का प्राचीन व महान शिक्षा-केन्द्र ! देश-विदेश से विद्यार्थी यहाँ शिक्षा प्राप्त करने आते थे | पूरे विश्व में तक्षशिला के नाम का डंका बजा करता था | उस दिन तक्षशिला में दीक्षांत समारोह था | उपाधि...
असावधानी नुकसानदेह हो सकती है | एक राजा बहुत ही सदाचारी, प्रजापालक व स्वभाव से ही धर्मात्मा था | उसका एक पुत्र भी था | वह भी अपने पिता की भाँति सुशील, गुणवान, मधुरभाषी, पराक्रमी व आज्ञाकारी था | एक दिन...
न्यूटन का एक पालतू कुत्ता था  - डायमंड | हालाँकि वह बहुत शरारती था , पर न्यूटन का दुलारा था | एक रात डायमंड घर पर अकेला था | न जाने उसे क्या सूझी ! अपने मालिक की स्टडी...
महान उद्देश्य के लिए गुरूओं ने कुर्बानियाँ दीं | सिक्ख इतिहास इन कुर्बानियों का साक्षी है | बात उस समय की है, जब नवम पातशाह श्री गुरू तेग बहादुर जी ने समाज को मुगलों के अत्याचार से मुक्त कराने...
एक बार की बात है | एक कक्षा में दो सहपाठियों के बीच किसी बात को लेकर बहस छिड़ गई | पहले छात्र के अनुसार वह ठीक था और उसका  सहपाठी गलत ! वही दूसरे छात्र के अनुसार वह...
एक बार संत कबीर ने बड़ी कुशलता से एक पगड़ी बनाई | झीना-झीना कपड़ा बुना और उसे गोलाई में लपेटा | हो गई पगड़ी तैयार ! वह पगड़ी जिसे हर कोई बड़ी शान से अपने सिर पर सजाता है...
अर्थवसु महात्मा बुद्ध का शिष्य था | वह बहुत धनी था, पर बेहद कंजूस भी था | न खुद ज्यादा खर्चता था, न अपने बच्चों को खर्चने देता था | जितना बहुत ज़रूरी होता था, बस उतना ही खर्चा...
सभाकक्ष में मंच सजा था | सभी श्रोतागण अपना-अपना स्थन ग्रहण कर चुके थे |  तभी वक्ता महोदय ने कक्ष में प्रवेश किया | किन्तु उनका  अंदाज थोड़ा हट के था | वे हाथ में १000 रूपये का नोट...

Latest news

MUST READ