साधना से ही होता है निर्माण

170 views

साधना से ही होता है निर्माण

एक बार स्वामी दयान्द सरस्वती के शिष्य गुरूदत्त से किसी ने पूछा – ‘ आप अपने गुरूदेव के महान जीवन चरित्र पर कोई पुस्तकख्यों नहीं लिखते? इससे उनके आदर्शों को समाज तक पहु़ँचाने में बहुत मदद मिलेगी|’ गुरूदत्त उस व्यक्ति की बात सुनकर कुछ लम्हों के लिए मौन हो गया, बल्कि कहीं खो ही गया| व्यक्ति ने गुरूदत्त को हल्का-सा हिलाया और कहा – “क्या हुआ? क्या आपको मेरा सुझाव सही नहीं लगा? ” गुरूदत्त ने संकल्प से भरी आवाज में उत्तर दिया- “मैं अवश्य लिखूँगा अपने गुरूदेव के जीवन-चरित्र पर एक किताब! ऐसी किताब, जिसे पढ़कर दुनिया उनकी महिमा के आगे नतमस्तक होगी! मैं आज से ही यह प्रयास शुरू करूँगा| छ: महीने के बाद उस व्यक्ति की भेंट पुन: गुरूदत्त से हुई| उसने पूछा- “पुस्तक कहाँ तक पहुँची?”
*गुरूदत्त*- कार्य अभी तक चल रहा है… मैंने पूरे उत्साह से प्रयास आरम्भ कर दिए हैं|
एक साल बीता…
*व्यक्ति*- क्या?? अभी तक लेखन कार्य पूरा नहीं हुआ?
*गुरूदत्त*- नहीं… पर मेरी कोशिश जारी है| बस मुझे कुछ समय और चाहिए|
दो वर्ष बीते…
*व्यक्ति*- मैं आपकी पुस्तक पूरी होने का समाचार सुनने के लिए इंतज़ार करता रहा| पर लगता है, आप मुझे बताना भूल गए| खैर, कोई बात नहीं… पर अब शीघ्र ही उसकी झलक दिखाइए| मैं उस किताब को देखने के लिए बहुत उत्सुक हूँ|
*गुरूदत्त*- जी, मैं आपको बताना नहीं भूला| दरअसल, अभी किताब पूरी नहीं हुई है| मैं जी तौड़ मेहनत कर रहा हूँ|
वह व्यक्ति हैरानी से गुरूदत्त को देखने लगा| मन ही मन सोचने लगा – “इतनी लगन और धैर्य से लिखी गई किताब नि:संदेह समाज में क्रांति की लहर बहाएगी|
काफ़ी माह बीत जाने के बाद… एक दिन गुरूदत्त के चेहरे पर अद्भुत चमक देखकर सहसा ही वह व्यक्ति बोल पड़ा – ” तो आखिरकार, आपने अपने गुरूदेव की जीवनी लिखने में सफलता हासिल कर ही ली… क्यों, मैं सही कह रहा हूँ न?”
*गुरूदत्त (नितांत सहजता से)*- जी… देखिए, पुस्तक आपके सामने है|
*व्यक्ति*- कहाँ है?
*गुरूदत्त*- मैंने अपने गुरूदेव के अनमोल आदर्शों को, उनके श्री वचनों को कागज़ पर नहीं उकेरा| बल्कि ध्यान-साधना की कलम से लिखने का प्रयास किया है| मैंने पूरी कोशिश की है इस संसार को यह संदेश देने की कि – मेरे गुरूदेव के वचन, उनका चरित्र, उनका व्यक्तित्व इतना महान है कि उसे जो भी मन के कागज़ पर लिख लेता है, वह जगत के लिए प्रेरक पुस्तक बन जाता है| *व्यक्ति*- सच, यह पुस्तक तो अद्वितीय है| गुरूदेव की महानता की अनूठी अभिव्यक्ति है|

Leave a reply

Leave a Reply