समता और धर्म

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समता और धर्म

समता शक्ति से कुल दुनिया का निज़ाम खड़ा है| समता के आधार पर कुल दुनिया की राजनीति और धर्म नीति बनी है|
समता शक्ति अनुभव करके कुल महापुरूषों ने निज़ात हासिल की और लोगों को राहत-ए-अबदी सिखलाई| समता ही को धर्म कहते हैं, जब इसका प्रकाश लोप हो जाता है उस वक्त फ़िर सत्पुरूष आकर अमली ज़िन्दगी द्वारा प्रकाश दिखलाते हैं|
समता ही असली खुशी है, जो हर एक जीव अन्तर से चाहता है| समता ही जीवन है| समता ही असली स्वराज है जो हर एक दुनियावी कैद से निज़ात देता है और परमानन्द को प्राप्त करता है| समता ही का ज़हर कुल दुनिया है| सब पदार्थ एक दूसरे के प्रेम से खड़े हैं| समता ही का विचार कुल दुनियाँ की किताबें बतलाती हैं| समता ही कुल फ़कीरों का मैराज यानि परमपद है| समता तत्व चेतन प्रकाश अनादि है| समता से ही मानुष जूनी जीवों से उत्तम मानी गई है| समता ही आनन्द है, नित है, निर्वाण है, सबकी बुद्धि में उसकी चमक है|
समता की हिदायत सबको निज़ात देने वाली है सब महजब़ी झगड़ों और दुनिया के झगड़ों से|
समता की हिदायत करने वाला ही असली रहनुमा है| समता की आनन्द हालत को प्राप्त होना ही असली भक्ति है| समता के असली भाव को समझने से ही सब राजा प्रजा सुख पाते हैं| समता का ही विचार असली सत्संग है|
समता ही जीवन सब सत्पुरूषों का है| समता ही असली औषधि है जो जीव के सब रोग दूर करती है|
समता को नेह:चल बुद्धि करके विचार करना और विरत रहित मन करके विचार करना ही असली योग है| समता ही अनादि विद्या है| समता की खोज ही असली आनन्द है|
समता का असली रस इन्द्रियों के भोगों से विरक्त होने से मिलता है| समता ज्ञान से ममता विकार त्रैगुण माया का अभाव हो जाता है| समता ज्ञान से कर्मों के फल से निज़ात मिलती है| समता ज्ञान की उपासना के बगैर सब यत्न अकार्थ है| समता ज्ञान ही अनादि काल से सब ज्ञानियों को अनुभव हुआ | *समता ज्ञान* सत् कर्म, सत् विचार, शुद्ध आहार, सत् विश्वास, झूठ से वैराग्य और सत् में अनुराग पैदा करने से हासिल होता है | समता ज्ञान को हासिल करने की खातिर सत्पुरूषों की सगंत लाज़मी है|
समता ज्ञान को जो प्राप्त होवे उसके अन्दर ये परम गुण प्रकाश करते हैं- निष्कामता, निर्मानता, उदासीनता, निह:चलता, परोपकार और समभाव में यत्न | समता ज्ञानी को बार-बार नमस्कार करके असली तत्त समता धर्म की शिक्षा धारण करनी लाजमी है| सब महज़बों की जान समता है|
समता के धर्म को पूर्ण विश्वास करके धारण करना चाहिए| समता ज्ञान के बगैर कभी बुद्धि शुद्ध नहीं होती| समता का असली अर्थ यह है कि हर हालत में एक रस होना, ग्रहण और त्याग की कामना से मुक्ति हासिल करनी, ये ही ईश्वर की भक्ति और मुक्ति है|
समता प्रकाश सबके अन्तर चमक रहा है, मगर मनमुखता से जीव उसको अनुभव नहीं कर सकता| समता ज्ञान शुद्ध उपासना से, यानि ईश्वर को कर्ता-हर्ता समझ कर सिमरण करने से हासिल होता है| समता तत्त का अनुभव करने वाला ही शिरोमणी और अजीत पुरूष है| समता ज्ञान की असली परस्तिश यह है कि एक ईश्वर को सर्वव्यापक देखना, किसी से वैर न करना,आचार को शुद्ध करना, खुदगर्जी की बू को निकालना, सिर्फ़ एक ईश्वर का भरोसा रखना, उसकी इबादत करनी, उसके नाम पर दान करना, उसकी आज्ञा मानकर उसी के सर्व जगत की सेवा करनी| *समता ज्ञान कोई फ़िरका या मजहब नही है, बल्कि हर एक मजहब की बुनयादी रोशनी है|* ये ही असली ज्ञान अनानियत यानि खुदी को नाश करने वाला है और अखण्ड शान्ति यानि ईश्वर प्राप्ति देता है|
समता की खोज नित ही करो, ये ही हुक्म ईश्वर का है| ईश्वर विश्वास, ईश्वर अनुभव, ईश्वर में स्थिति समता ज्ञान से ही होती है|
बाद मुबाद के प्रमाद से जब तक बुद्धि नहीं छूटती तब तक समता ज्ञान यानि नित आनन्द स्वरूप को नहीं प्राप्त हो सकती|
हर एक को प्रेम करना, क्रोध को नाश करता है|
हर एक की सेवा करनी अभिमान और लोभ को नाश करती है|
ईश्वर को सत् जानकर उसका सिमरण करना मोह और काम को नाश करता है|
जब ऐसी धारणा यानि ईश्वर भक्ति और लोक सेवा चित्त में स्थित होती है उस वक्त ये जीव सब माया के विकारों से छूट कर समता ज्ञान

समता क्या है?

समता शक्ति से कुल दुनिया का निज़ाम खड़ा है|
समता के आधार पर कुल दुनिया की राजनीति और धर्म नीति बनी है|
समता शक्ति अनुभव करके कुल महापुरूषों ने निज़ात हासिल की और लोगों को राहत-ए-अबदी सिखलाई|
समता ही को धर्म कहते हैं, जब इसका प्रकाश लोप हो जाता है उस वक्त फ़िर सत्पुरूष आकर अमली ज़िन्दगी द्वारा प्रकाश दिखलाते हैं|
समता ही असली खुशी है, जो हर एक जीव अन्तर से चाहता है|
समता ही जीवन है|
समता ही असली स्वराज है जो हर एक दुनियावी कैद से निज़ात देता है और परमानन्द को प्राप्त करता है|
समता ही का ज़हर कुल दुनिया है| सब पदार्थ एक दूसरे के प्रेम से खड़े हैं|
समता ही का विचार कुल दुनियाँ की किताबें बतलाती हैं|
समता ही कुल फ़कीरों का मैराज यानि परमपद है|
समता तत्व चेतन प्रकाश अनादि है|
समता से ही मानुष जूनी जीवों से उत्तम मानी गई है|
समता ही आनन्द है, नित है, निर्वाण है, सबकी बुद्धि में उसकी चमक है|
समता की हिदायत सबको निज़ात देने वाली है सब महजब़ी झगड़ों और दुनिया के झगड़ों से|
समता की हिदायत करने वाला ही असली रहनुमा है|
समता की आनन्द हालत को प्राप्त होना ही असली भक्ति है|
समता के असली भाव को समझने से ही सब राजा प्रजा सुख पाते हैं|
समता का ही विचार असली सत्संग है|
समता ही जीवन सब सत्पुरूषों का है|
समता ही असली औषधि है जो को जीव के सब रोग दूर करती है|
समता को नेह:चल बुद्धि करके विचार करना और विरत रहित मन करके विचार करना ही असली योग है|
समता ही अनादि विद्या है| समता की खोज ही असली आनन्द है|
समता का असली रस इन्द्रियों के भोगों से विरक्त होने से मिलता है|
समता ज्ञान से ममता विकार त्रैगुण माया का अभाव हो जाता है|
समता ज्ञान से कर्मों के फल से निज़ात मिलती है| समता ज्ञान की उपासना के बगैर सब यत्न अकार्थ है|
समता ज्ञान ही अनादि काल से सब ज्ञानियों को अनुभव हुआ |
समता ज्ञान- सत् कर्म, सत् विचार, शुद्ध आहार, सत् विश्वास, झूठ से वैराग्य और सत् में अनुराग पैदा करने से हासिल होता है |
समता ज्ञान को हासिल करने की खातिर सत्पुरूषों की सगंत लाज़मी है|
समता ज्ञान को जो प्राप्त होवे उसके अन्दर ये परम गुण प्रकाश करते हैं- निष्कामता, निर्मानता, उदासीनता, निह:चलता, परोपकार और समभाव में यत्न |
समता ज्ञानी को बार-बार नमस्कार करके असली तत्त समता धर्म की शिक्षा धारण करनी लाजमी है|
सब महज़बों की जान समता है|
समता के धर्म को पूर्ण विश्वास करके धारण करना चाहिए|
समता ज्ञान के बगैर कभी बुद्धि शुद्ध नहीं होती|
समता का असली अर्थ यह है कि हर हालत में एक रस होना, ग्रहण और त्याग की कामना से मुक्ति हासिल करनी, ये ही ईश्वर की भक्ति और मुक्ति है|
समता प्रकाश सबके अन्तर चमक रहा है, मगर मनमुखता से जीव उसको अनुभव नहीं कर सकता|
समता ज्ञान शुद्ध उपासना से, यानि ईश्वर को कर्ता-हर्ता समझ कर सिमरण करने से हासिल होता है|
समता तत्त का अनुभव करने वाला ही शिरोमणी और अजीत पुरूष है|
समता ज्ञान की असली परस्तिश यह है कि एक ईश्वर को सर्वव्यापक देखना, किसी से वैर न करना,आचार को शुद्ध करना, खुदगर्जी की बू को निकालना, सिर्फ़ एक ईश्वर का भरोसा रखना, उसकी इबादत करनी, उसके नाम पर दान करना, उसकी आज्ञा मानकर उसी के सर्व जगत की सेवा करनी|
समता ज्ञान कोई फ़िरका या मजहब नही है, बल्कि हर एक मजहब की बुनयादी रोशनी है| ये ही असली ज्ञान अनानियत यानि खुदी को नाश करने वाला है और अखण्ड शान्ति यानि ईश्वर प्राप्ति देता है|
समता की खोज नित ही करो, ये ही हुक्म ईश्वर का है|
ईश्वर विश्वास, ईश्वर अनुभव, ईश्वर में स्थिति समता ज्ञान से ही होती है|
बाद मुबाद के प्रमाद से जब तक बुद्धि नहीं छूटती तब तक समता ज्ञान यानि नित आनन्द स्वरूप को नहीं प्राप्त हो सकती|
हर एक को प्रेम करना, क्रोध को नाश करता है|
हर एक की सेवा करनी अभिमान और लोभ को नाश करती है|
ईश्वर को सत् जानकर उसका सिमरण करना मोह और काम को नाश करता है|
जब ऐसी धारणा यानि ईश्वर भक्ति और लोक सेवा चित्त में स्थित होती है उस वक्त ये जीव सब माया के विकारों से छूट कर समता ज्ञान में प्रवेश कर जाता है|

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