लोक सेवा

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जो जीव़ अपनी औलाद की सेवा में लगे रहते हैं और लोक सेवा की तरफ़ राग़ब नहीं होते उनको आखिर तज़रबा होता है कि उनकी औलाद उनके एहसान फ़रामोश कर देती है| अगर किसी दूसरे जीव पर अहसान किया जावे वो तमाम उम्र उसके अहसान को याद रखता है| एक पुरूष अपनी लड़की की शादी पर लाखों रूपये देता है| मगर लड़का उसका अहसान नहीं मानता| बल्कि कहता है कि थोड़ा दिया है| अगर तुम गरीब की लड़की पर एक हज़ार रूपये भी खर्च कर दो, वो तमाम उम्र तुम्हारा यश गाता रहेगा, जब तक कुर्बानी ना की जाए दुनिया कायल नहीं होगी|
नौशेखां का अदल क्यों मशहूर था| नौशेखां का बाप एक तिरख़ान औरत को ज़बरदस्ती निकाल लाया, और उसके बदन से नौशेखां पैदा हुआ था| जब नौशाखां का बाप मर गया और नौशेखां तख्त पर बैठा| उस तिरख़ान ने दरबार में आकर इंसाफ़ के लिए दरखवास्त दी, और कहा – कि पहला बादशाह उसकी औरत को जबरदस्ती निकाल लाया था, वो औरत मुझे दिलाई जावे| नौशेखां ने अपनी माँ को दरबार में बुलाया और दरयाफ्त किया – कि क्या बादशाह उसको ज़बरदस्ती निकाल लाया था या उसकी मर्जी से निकाल लाया था | जब उसकी माँ ने जवाब दिया – कि वो उसको जबरदस्ती निकाल लाया था | उसने उसी वक्त हुक्म दिया कि वो उसको पकड़कर ले जावे | तिरखान नौशेखां की माँ को पकड़कर ले गया, जब बाहर निकला तो लोगों ने समझाया कि अब तू इस औरत को ले जाकर क्या करेगा| तू कैसा इसका खर्च बर्दाश्त करेगा | तेरा इंसाफ हो गया, अब तेरे लिए बेहतर है कि तू इसको वापिस कर दे| तुझे इसके बजाए नगद रूपये मिल जावेंगे| उसने वापिस आकर ऐसा ही किया तो नौशेखा ने अपनी वालिदा के तोल के बराबर धन दे दिया| इसीलिए नौशेख़ा काअदल मशहूर है|
हरीशचन्द्र की शमशान में नौकरी लगी थी| उसके पुत्र को जलाने के लिए लाते हैं| मगर बो अपने फ़र्ज का पाबन्द उसे जलाने नहीं देता| उसको अपना कर्तव्य याद है | गुरू गोबिन्द सिंह के चारों बच्चे शहीद हो गए| दो चमकोर की रणभूमि में शहीद हुए औेर दो सरहन्द में | वक्त के हाकिम ने दीवार में चिनवा दिए| उस वक्त गुरू गोबिन्द सिंह ने कहा – कि क्या हुआ जो चार बच्चे शहीद हो गए |
बुद्धिमान पुरूषों के दिल में कभी नहीं आया है कि ये मेरा है, ये पराया है| तंग दिल कमीन लोगों की क्या ज़िन्दगी है| जिस तरह तू अपने सुख को चाहता है, उसी तरह दूसरों के सुखों को समझ | लोक सेवा की तालीम कृष्णा ने गीता में दी है, मगर वो गायब हो गई | यतीम, अनाथ, अन्धे, लूले-लंगडे़ जीवों की सेवा का किसी को ख्याल नहीं| सिर्फ गौ, ब्राह्मण की सेवा का ज़िकर आता है| पुरातन तालीम गरूब हो गई| इसीलिए भारत को ज़वाल आया| मग़रबी तालीम ने आँखें खोली, काँग्रेस ने रोला डालना शुरू किया, तब पुराने ग्रन्थ खोले और अपनी तालीम को देखा| कानून कुदरत को जो कौम छौड़ जाती है वो तबाह हो जाती है| दूसरी कौमें आकर उसको दबा लेती हैं| अधिकारी की सेवा जिस मुल्क में नहीं होती, उसका भला नहीं हो सकता| हिन्दु कौम असलियत से बहुत दूर चली गई है इसलिए तबाह हो रही है|

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