बोझ और दुर्गन्ध

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एक बार एक अध्यापिका ने छात्रों को एक प्रयोग करने के लिए कहा | वे बोली – ‘बच्चों ! हम अपने जीवन के सफर में बहुत से लोगों से मिलते हैं |  कुछ लोग हमें बहुत अच्छे लगते हैं | और कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जिनसे हम नफ़रत करते हैं | आप सभी आज उन लोगों की सूचि बनाओ, जिनसे आप नफ़रत करते हैं | सभी बच्चों ने नाम लिखने शुरू कर दिए | अध्यापिका के कहे अनुसार सभी विद्यार्थियों ने सूचि बनाई | किसी की सूची में ४ नाम थे, किसी में ७ तो किसी में १० नाम थे|  सूची देखने के बाद अध्यापिका ने कहा – “कौन-कौन चाहता है कि उसकी सूची में शामिल लोगों से उन्हें जो-जो परेशानियाँ हैं, वे सब समाप्त हो जाएँ ? सभी बच्चों ने हाथ उठा दिए |

अध्यापिका ने कहा – इसके लिए आप सभी को एक काम करना होगा | घर जाकर सूची में लिखे लोगों के नाम का एक – एक टमाटर एक थैले में डालना होगा |  जिसकी सूची में जितने नाम होगें, उसके थैले में उतने ही टमाटर होगें | फ़िर कल से ७ दिनों तक वह थैला आपको हर समय अपने साथ रखना होगा | आप जहाँ भी जाओगे – स्कूल में, बस में, घर में, खेलते समय, खाते समय, पढ़ते समय, रात को सोते समय, अर्थात्  हर समय, हर काम करते हुए, वह थैला आप सभी के पास होना चाहिए|  सभी बच्चे समझ गए,  अध्यापिका ने पूछा |

सभी विद्यार्थी एक साथ – जी मैडम |

अगले दिन सभी बच्चे टमाटरों का थैला लेकर स्कूल पहुँचे | अब वे हर समय, हर जगह उस थैले को अपने साथ रखते | ३ – ४ दिनों तज सब ठीक-ठाक चलता रहा | पर उसके बाद टमाटर सड़ने लगे और उनके थैलों में से दुर्गन्ध आनी शुरू हो गई | पाँचवें दिन तक तो अधिकतर बच्चों के नाक पर रूमाल आ गया | इसी प्रकार २ दिन और बीत गए |   आठवें दिन बच्चे बेसबरी से अध्यापिका के कक्षा में आने का इन्तज़ार करने लगे | अध्यापिका ने कक्षा में प्रवेश करते ही पूछा – “अब यह बताओ कि पिछले ७ दिन टमाटर के थैले के साथ कैसे बीते ? ”  सभी बच्चेएक साथ बोले – ‘ बहुत मुश्किल,  बहुत बुरे ! ! इस थैले के बोझ और दुर्गन्ध ने तो हमारा जीना ही मुश्किल कर दिया है | ‘

अध्यापिका ने तुरन्त ही सारे थैले कुड़ेदान में फिकवा दिए | फिर बच्चों से पूछा – “अब बताओ, कैसा लग रहा है ?” सभी बच्चे एक साथ बोले  -‘थैले के बोझ और दुर्गन्ध से छुटकारा पाकर बहुत हल्का और अच्छा लग रहा है |’

अध्यापिका ने कहा – यही तो मैं आप सभी को समझाना चाहती हूँ | ऐसा ही प्रतीत होता है, जब हम अपने मन में किसी के भी प्रति ईर्ष्या, द्वेष व नफ़रत जैसे भाव रखते हैं | ये बुरे विचार या दुर्भावनाएँ हमारे मन में दुर्गन्ध उत्पन्न करती हैं | हम जहाँ कहीं भी जाते हैं, यह गन्ध हमारे साथ जाती है | ठीक उस टमाटर के थैले की भाँति ! अब आप सभी सोच सकते हैं कि जब सड़े हुए टमाटरों की दुर्गन्ध ने सिर्फ ७ दिनों में आपका जीना दूभर कर दिया, तो किसी के प्रति ज़िन्दगी भर अपने  मन में गुस्सा, नफ़रत, द्वेष रखना कितना दु:खदायी होगा ? इससे किसी ओर का नहीं, बल्कि आपका ही नुकसान होगा | इसलिए आज से, बल्कि अभी से ही अपने मन से सारे बुरे विचारों और नफ़रत को  निकालकर फ़ैंक दीजिए | और उनकी जगह अच्छे विचारों और प्रेम को स्थान दीजिए |

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