प्रतिज्ञा – नियमों का पालन

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गौतम और शुभम दो दोस्त थे |  उन्हें स्कींइग करने का बड़ा शौक था |  जब भी मौका मिलता , वे स्कींइग करने पहुँच जाते |  एक दिन वे दोनों स्कींइग का आनंद ले रहे थे |  एक दूसरे के पीछे चलते हुए उन्हें पता ही नहीं लगा कि वे काफी दूर निकल आए हैं |  उन्हें इसका पता तब चला , जब उन्होंने देखा कि आसपास कोई नहीं है |  दोनों यह देखकर घबरा गए |  तभी गौतम का पैर फिसल गया और वह एक ढलान से नीचे गिरने लगा |

शुभम ने यह देखा, तो वह उसके पास आया |  गिरने से गौतम को कुछ चोटें भी लगी थीं |  धीरे-धीरे अंधेरा घिरने लगा |  गौतम त्रंड से बेहोश भी हो गया |  शुभम ने देखा  पास ही रोशनी दिखाई दे रही थी |  वह गौतम को लेकर उस ओर गया, तो देखा कि एक झोंपड़ी से वह रोशनी आ रही थी |  शुभम गौतम को झोंपड़ी में ले गया, पर वहाँ कोई नहीं था |  झोंपड़ी में एक ओर आग जल रही थी, जो बुझने वाली थी |  ऐसा लग रहा था, जैसे कोई आग तपाकर कहीं चला गया हो |  शुभम गौतम को आग के पास ले आया और उसमें पास ही रखी लकड़ियों को डाल दिया |    आग की गर्मी से गौतम को होश आ गया और वह उठकर बैठ गया, लेकिन उसमें इतनी शक्ति न थी कि वह अपने पैरों पर चलकर घर वापिस जा सके |

दोनों मित्र इस बात पर अपने को कोस रहे थे कि उन्होंने जगह-जगह लगे संकेतों का उल्लंघन किया और दुस्साहस  से आगे बढ़ते चले गए |  उन्हें सुबह तक किसी राहत की उम्मीद न थी |  शुभम गौतम को वहीं लिटाकर झोंपड़ी से बाहर किसी मदद की तलाश कर रहा था |  तभी उसे आसमान में एक हेलीकाॅप्टर नजर आया |  चांदनी रात होने के कारण हेलीकाॅप्टर में सवार सुरक्षाकर्मियों ने उसे देख लिया |  दोनों मित्र हेलीकाॅप्टर से जब स्कींइग क्लब पहुँचे, तो देखा उनके पापा बड़ी बेचैनी से उनका इंतज़ार कर  रहे थे |  उन्होंने उनके लापता होने की सूचना स्कींइग क्लब को दी थी, जिसके तहत यह रेस्क्यू  आपरेशन हुआ था |  गौतम और शुभम ने आगे से कभी दुस्साहस न करने की प्रतिज्ञा की |

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