नेक प्रयास – एक नन्हा-सा पौधा

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आकांक्षा के जन्मदिन के दिन जब वह स्कूल से लौटी, तो उसने अपनी मम्मी को पोलीथीन में कचरा पैक करते हुए देखा | कचरे में हरी सब्जियों के पत्ते और टुकड़े भी थे | वह मम्मी से कहने लगी कि आज जब वह स्कूल से घर आ रही थी, तो उसने गाय को कचरे के ढेर में से चारा खोजते देखा | एक पालीथीन में कुछ पत्ते थे, लेकिन कितनी कोशिश करने के बाद भी वह निकाल नहीं पाई, तो वह पालीथीन ही चबा गई |
मम्मी बोली, ‘सच में मैं गल्ती कर रही हूँ, ये प्लास्टिक के बैग तो जानवरों के पेट में जाकर उन्हें बीमार कर देते होंगे |
आकांक्षा बोली – ‘मम्मी आपको पता है, ये प्लास्टिक तो वर्षों तक न तो सड़ते हैं और न ही गलते हैं | साथ ही ये आक्सीजन को भी रोकते हैं | भूख के कारण जानवर इन्हें खा तो लेते हैं लेकिन फिर बीमारी मे अपना जीवन काटते हैं |’ आकांक्षा कूड़े को अलग-अलग करने लगी | तो उसने देखा कि जिस आम को खाकर और चूसकर फैंक दिया था वह पौधे का रूप ले रहा था | खुशी से उसकी आँखे चमकने लगी, वह अंदर से खुरपी ले आई, और चुपचाप आंगन में एक किनारे पर जमीन को खोदकर भुरभुरा कर दिया, और गोबर की खाद लाकर उस मिट्टी में मिला दी और पौधे को रोपकर पानी डाल दिया | यह बात उसने किसी को नहीं बताई | शाम को पार्टी के बाद सब खा-पीकर सो गए | अगले दिन मम्मी-पापा ने पौधे को देखा लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया | अब आकांक्षा का ध्यान हमेशा उस पर रहता | पढ़ने से जब भी उसे समय मिलता वह पौधे की सेवा करती |

एक दिन जब वह स्कूल से घर पहुँची, उसने देखा की किसी गाय ने उसका एक हिस्सा चर लिया था | पौधा हाथ टूटे बच्चे की तरह लग रहा था | उसे एक ख्याल आया कि पौधे के चारों तरफ घेराबंदी करनी चाहिए | उसने बांस की टूटी टहनियों से पौधे के चारों तरफ एक घेरा बना दिया | और पुरानी फटी मच्छरदानी से ढक दिया ताकि पौधा सुरक्षित रहे | आकांक्षा पौधे की पूरी तरह से देखभाल कर रही थी, इसके बावज़ूद उसने अभी तक किसी को पौधे के बारे में कुछ नहीं बताया था | वह बढ़ते पौधे को देखकर बहुत खुश होती थी | एक दिन उसके हाथों से रोपे गए पेड़ के बौर से पूरे घर का अहाता सुगंधित हो जाएगा, ऐसा सोच-सोचकर वह उत्साहित होती रहती थी | प
लेकिन एक समस्या थी, पौधे का जो बाड़ा उसने बनाया था वह बहुत कमजोर था और जानवरों के रौंदने से टेड़ा-मेड़ा भी हो गया था | लेकिन अभी तक वह सुरक्षित था | अब आकांक्षा को लग रहा था कि मम्मी-पापा की मदद लेनी चाहिए | लेकिन वह यह भी चाहती थी कि वह मम्मी-पापा को सरप्राइज़ गिफ्ट की तरह दे |

एक वर्ष के बाद उसका जन्मदिन आ गया | उसके पापा ने उससे गिफ्ट के लिए पूछा, तो उसने कहा- पापा शाम को बताऊँगी | उसने अपने कई मित्रों को भी बुला रखा था | अपने मित्रों के साथ मिलकर पौधे के आस-पास की जगह साफ़ कर दी | उसने सबको यही बताया कि वह खुले में अपना जन्मदिन मनाना चाहती है | शाम को वह मम्मी-पापा को पौधे के पास लेकर गई | उसके सभी मित्र भी वहीं थे | उसने सबको बताया कि आज केवल उसका जन्मदिन ही नहीं है, किसी ओर का भी है | सभी ने पूछा, और किसका जन्मदिन है | तब उसने पौधे को सहलाकर कहा -‘इस सलोने पौधे का |’

सब आश्चर्य एवं खुशी से उसे देखने लगे | उसने कहा, ‘मम्मी-पापा, मैं इसे आज इसके जन्मदिन पर आपको सौंपना चाहती हूँ, और मेरे गिफ्ट के बारे में आपने पूछा था, तो मैं चाहती हूँ कि आप इस पौधे के चारों तरफ ईंट-सीमेंट का जालीदार घेरा बनवा दें, ताकि यह सुरक्षित हो जाए |’ मम्मी-पापा ने उसे गले से लगा लिया, और सभी बच्चे तालियाँ बजाने लगे | इसके बाद आकांक्षा ने केक काटा, और सभी बच्चों ने बधाइयाँ दी, और खेलने लगे | आकाक्षां बहुत खुश थी अपनी सफलता के लिए |

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