नए साल का रेजुलेशन

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जाॅन और रोहन के पापा सेना में अफसर थे |  उनकी पोस्टिंग कश्मीर में थी |  जाॅन और रोहन की स्कीइंग में बहुत रूचि थी |  जब भी छुट्टियाँ होती, वे स्कीइंग करते |  इस बार वे नए साल पर होने वाली स्कीइंग चैंपियनशिप जीतना चाहते थे |  इसलिए वह स्कीइंग के नए-नए कीर्तीमान बनाने की होड़ में लगे थे |  दोनों ने नए साल को एक अलग ढ़ग से मनाने की सोच रखी थी |  इसि होड़ में वे कुछ अलग ही करतब सीख रहे थे |

एक दिन स्कींइग करते-करते दोनों मित्र  बहुत दूर निकल आए |  उन्होंने जगह-जगह लगे खतरे के संकेतों को भी अनदेखा कर दिया और उत्सुकतावश एक अनजान दिशा की ओर बढ़ते चले गए |  उन्हें इस रोमांचकारी यात्रा में बड़ा मजा आ रहा था |  उन्हें पता ही न चला कि कब वे दोनों फिसलते हुए एक गहरे गड्ढ में जा गिरे |  जाॅन को कुछ चोटें भी आई, पर्रोहन को खरोंच तक न आई और उसने जाॅन को संभाल लिया |

रोहन को राॅक क्लाइबिंग का भी शौक था |  उसने गड्ढे में इधर-उधर मदद के लिए देखा | स्कींइग क्लब ने वहाँ सुरक्षा की दृष्टि से एक  रस्सी लटका रखी थी |  रोहन ने जाॅन को उसके पैरों पर खड़ा किया |  उसे हौसला देने लगा कि वह उसे सुरक्षित ऊपर ले जाएगा |  कुछ समय बाद जब जाॅन की हालत ठीक हुई, तब तक अंधेरा घिर आया | लेकिन चाँद की रोशनी में वे अपने आसपास देख सकते थे |   रोहन ने  उसे अपने शरीर से रस्सी से बाँध लिया |  फिर वह रस्सी के ऊपरी सिरे को पकड़कर धीरे-धीरे ऊपर सरकने लगा |  बड़ी मुश्किल से दोनों रस्सी के सहारे गड्ढे से बाहर आ गए |

उधर उन दोनों के पापा भी उन्हें खोजते हुए वहाँ पहुँच गए |  पहले तो उन्होंने उन्हें बहुत डांटा, पर जब उन्हें रोहन की बहादुरी का पता चला, तो उन्होंने उन्हें माफ कर दिया |  तब जाॅन और रोहनणे नए साल का अपना रेजुलेशन बताया कि वे नए साल में अच्छे काम करांगे और नियमों का पालन करेंगे |  यह सुनकर दोनों के पापा खुश हो गए |

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