नंदन वन के कई बच्चे नए साल के पहले दिन सुबह गार्डन जा रहे थे |  रास्ते में तेल गिरा था |  उसे देखकर नन्हे ब्लैकी भालू ने कहा -‘सड़क पर तेल गिरा होने से दुर्घटना हो सकती है | हमें कुछ करना चाहिए |’
‘पागल हो गए हो तुम ? घर से निकले हो मार्निंग वाॅक पर और रास्ते में सड़क पर काम करने का मन बनाने लगे | तुम लोग डालो सड़क पर्रेत, मैं तो चला |’  – बैडी सियार यह कहकर आगे बढ़ गया |
‘मैं भी चला | यह हमारा काम नहीं है |’ – बंटू लोमड़ भी निकल गया |  वे दोनों आपस में शरारतपूर्ण बातें करते हुए चले जा रहे थे |
‘अब देखना, इस तेल में फिसलकर जानवर गिरेंगे |  गार्डन के बाहर रुककर हम आनन्द लेंगे |’ – बैडी बोला |
दोनों गार्डन के बाहर जाकर खड़े हुए ही थे कि डमडम हाथी कि बाइक तेल में फिसल गई | उसे देखकर दोनों खूब हंसे |  उधर ब्लैकी भालू, लंबू जिराफ, डंपी गधा, रानी हिरनी और फैटू सूअर तत्काल डमडम हाथी की मदद के लिए दौड़े |  उसे उठाया और उसकी बाइक भी सड़क क
किनारे  उठाकर रख दी |

‘धन्यवाद, बच्चो !  मैंने सड़क पर पानी समझकर बाइक धीमी नहीं की, इसलिए गिर गया |  तुम लोगों ने मेरी मदद की, इसे मैं कभी नहीं भूल सकता |’ – डमडम हाथी ने कहा |
‘थैंक्यू, अंकल ! आपको ज्यादा चिटठि नहीं लगी ? – ब्लैकी ने पूछा |
‘नहीं, बेटा ! मोटापे के कारण बैलेंस बिगड़ गया |’  -यह कहकर डमडम हाथी चला गया |
इसके बाद ब्लैकी की टीम पास के नाले में रेत लेने चली गई |  इसी बीच सड़क पर दूसरी दुर्घटना हो गई |  बच्चे तत्काल नाले से निकलकर सड़क पर आए |  उन्होंने देखा कि एक सियार सड़क पर बेहोश पड़ा है |  उसका सिर फट गया था  और खून बह रहा था |  उसकी बाइक को भी  काफी नुकसान हुआ था |  बाइक पुल से नीचे नाले में गिर गई थी |

‘ये तो बैडी के डैडी हैं |  इन्हें तत्काल अस्पताल ले चलना चाहिए |’ – ब्लैकी ने उन्हें पहचानते हुए कहा |  तब तक वहाँ दौड़कर बैडी और बंटू भी आ गए थे |  अपने डैडी की हालत देखकर बैडी रोने लगा |  ब्लैकी और उसकी टीम ने उसे धैर्य बंधाया |  इसके बाद ब्लैकी एक आटो रुकवाकर बैडी के डैडी को अस्पताल लेकर गया |
उसने दोस्तों से कहा -‘अस्पताल में मैं सब कुछ संभाल लूँगा |  तुम लोग सड़क पर्रेत डालो, ताकि किसी और की ऐसी हालत न हो |
‘ठीक है, हम लोग रेत डालते हैं |’ – यह कहकर सब बच्चे सड़क पर रेत डालते हैं |’ – यह कहकर सब बच्चे सड़क पर्रेत डालने लगे |  बैडी तो अपने डैडी के साथ  अस्पताल चला गया था, लेकिन बंटू लोमड़ को अब अकल आ गई थी |  उसने भी रेत डालने में बच्चों की मदद की |   बच्चों ने जल्दी ही सड़क पर रेत डालकर और कोई हादसा नहीं होने दिया |

उनके इस नेक कार्य को जिसने भी देखा, उनकी मुक्त कंठ से तारीफ की |  उधर बैडी के डैडी की मुश्किल से जान बची |  उन्हें कई बोतल खून चढ़ाया गया |  उन्हें पूरी तरह ठीक होने में कई माह लग गए |  नन्हा बैडी सियार अपनी करनी पर बेहद शर्मिंदा था |  उसने ब्लैकी और उसकी टीम से एक दिन माफी मांगते हुए कहा -‘दोस्तो, मुझे माफ कर दो | मैं अपनी करनी पर बेहद शर्मिंदा हूँ |  कान पकड़कर कह रहा हूँ कि आइंदा ऐसी गल्ती कभी नहीं करूँगा |’
‘हाँ, दोस्तो, मुझे भी माफ कर दो |’ – बंटू लोमड़ ने भी माफी मांगी |
ब्लैकी और उसकी टीम ने उन दोंनो को माफ कर दिया | वे दोंनो शरारती बच्चे वाकई सुधर गए और नेक कार्य में सहयोग देने लगे |

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