एक बार की बात है | एक कक्षा में दो सहपाठियों के बीच किसी बात को लेकर बहस छिड़ गई | पहले छात्र के अनुसार वह ठीक था और उसका  सहपाठी गलत ! वही दूसरे छात्र के अनुसार वह ठीक था और उसका सहपाठी गलत ! उनके विवाद को देखकर अध्यापिका ने पूरी कक्षा को ही जीवन की एक महत्त्वपूर्ण शिक्षा देने का निर्णय लिया |

अध्यापिका ने दोनों बच्चों को अपने पास आगे बुलाया | एक को अपने सामने रखी टेबल के दाईं ओर और दूसरे को बाईं ओर खड़े होने को कहा | फ़िर टेबक पर एक बड़ी-सी गेंद रख दी | अब अध्यापिका ने दाईं ओर खड़े बालक से गेंद का रंग पूछा | वह बोला – सफ़ेद ! यही प्रश्न उन्होंने बाईं ओर खड़े छात्र से भी पूछा | किन्तु उसका जवाब था – काला !

ऐसे में, दोनों बहस करने लगे | उन्हें शान्त करते हुए शिक्षिका ने कहा कि अब आप दोनों आपस में अपनी-अपनी जगह बदलो | बाईं ओर खड़ा बालक दाईं ओर हो गया और दाईं ओर खड़ा बालक बाईं ओर | पुन: दोनों से गेंद का रंग पूछा गया | पर अब की बार दोनों के उत्तर पहले से उलट थे | पहले जिस छात्र के अनुसार गेंद का रंग सफ़ेद था, अब वह उसका रंग काला बता रहा था | वहीं जिसके अनुसार पहले गेंद का रंग काला था, उसके लिए अब वह सफ़ेद रंग की थी | दोनों के बीच का वाद-विवाद खत्म हो गया |

अंतत: शिक्षिका सबको समझाते हुए बोलीं – ‘इन दोनों के झगड़े का कारण था – इनका अलग-अलग दृष्टिकोण ! और दृष्टिकोण का आधार है, दृश्य | वास्तव में, इन दोनों छात्रों ने भिन्न-भिन्न दृश्य को देखा | इसी वजह से इनके दृष्टिकोण में भेद आ गया | परिणामत: दोनों में तकरार की स्थिति पैदा हो गई | केवल इनमें ही नहीं, हर स्तर पर, चाहे वह पारिवारिक स्तर हो, सामाजिक या फिर द राष्ट्रों की बात ही क्यों न हो, हर तरह के विवाद की तह में दृष्तिकोण का अंतर है | क्योंकि हम भूल जाते हैं कि हर इंसान का दृष्टिकोण उसकी मानसिकता के अनुरूप दिखने वाले दृश्य के आधार पर अलग-अलग होता है | इसीलिए ज़रूरत है इस अंतर को समझने की ! तभी हम एक-दूसरे को भी समझ पाएँगे ! और जिस दिन ऐसा हो जाएगा, उस दिन इस तरह के झगड़ों-विवादों का भी अंत हो जाएगा ! यही है, शान्ति का सूत्र !”

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि प्रत्येक व्यक्ति में विवेक का संचार हो, ताकि सभी एक-दूसरे के दृष्टिकोणों को समझकर परस्पर प्रेम, शान्ति व सद् भाव से रह सकें |

Leave a Reply