गोलू गीदड़ जंगल की सफाई करता था | एक दिन सफाई करने के बाद गोलू आराम कर रहा था | तभी एक दिन अचानक वह उछल गया | उसे ध्यान आया – ‘आज नए साल का पहला दिन और मेरी सालगिरह भी है | मैं तो भूल ही गया |’ अब एकदम हो भी क्या सकता था ? नया साल और साथ ही सालगिरह मनाने के लिए न केवल बड़ा-सा केक बनवाया होगा, बल्कि दावत का इंतजाम भी करना होगा | थोड़ी बहुत सजावट भी करनी होगी | फिर सालगिरह पर जंगल के सभी जानवरों को भी बुलाना होगा, लेकिन गोलू के पास इतना समय ही नहीं था कि वह सालगिरह के सारे इंतजाम कर सके | इसलिए चुपचाप बैठा रहा |

‘हैप्पी बर्थ डे टू यू गोलू भाई |” यह भोलू भालू था | बोला -‘लो गोलू, अपनी सालगिरह का उपहार |’ भोलू अपने साथ एक बड़े मर्तबान में ढेर सारा शहद लाया था, जो उसने मधुमक्खियों के छत्तों से इकट्ठा किया था |
-‘धन्यवाद ! लेकिन मैं इस शहद का क्या करूँगा ?’
– ‘अरे ! अपनी सालगिरह पर मेहमानों को पेस्ट्री नहीं खिलाओगे क्या ? शहद पेस्ट्री में डाला जाएगा |’
-‘लेकिन पेस्ट्री बनाएगा कौन ? मुझे तो पेस्ट्री बनानी आती नहीं |’
-‘अरे भाई, तुम्हारी तो सालगिरह है ! तुम पेस्ट्री थोड़े ही बनाओगे | यह काम तो चंकी लोमड़ी का है |’
-‘हैप्पी बर्थडे गोलू !’ – तभी चंकी लोमड़ी आई |
गोलू गीदड़ चंकी को आश्चर्य से देखने लगा | फिर बोला -‘अरे, चंकी बहन, तुम्हें मेरी सालगिरह के बारे में पता कैसे लगा ? मैनें तो तुम्हें कभी नहीं बताया |’
-‘नहीं बताया तो क्या हुआ ? मुझे मालूम हो गया कि आज ही तुम्हारी सालगिरह है |’
इससे पहले कि गोलू कुछ कह पाता, चंकी रसोई में चला गया और पेस्ट्री बनाने लगा |
-‘हैप्पी बर्थडे गोलू मियां !’ यह मीकू बंदर था | वह अपने साथ एक बड़ी टोकड़ी में ढेर स्ट्राबेरी और फल लेकर आया था | वह फलों की टोकड़ी गोलू को थमाते हुए बोला -‘गोलू भाई ! मेरी कुछ मदद करो | मैं तुम्हारी सालगिरह के लिए जंगल के पेड़ों से तोड़कर ये फल लाया हूँ |
-‘लेकिन मैं इतने फल कैसे खाऊँगा ?’
-‘ये फल तुम्हारी सालगिरह में आने वाले मेहमानों को दिए जाएँगे |’ गोलू आश्चर्यचकित सा मीकू बंदर को देखता रहा |
‘हैप्पी बर्थडे गोलू भाई !’ – गोलू ने देखा कि शेर सिंह बड़ा-केक लिए और जंगल के बाकी जानवर अपने हाथों में बड़े-बड़े उपहार लिए सीधे उसके घर चले आ रहे थे | पीलू चीता, जंबो हाथी, डिंकी गैंडा, चिंकू मोर, मिटंठू तोता और सुरीली कोयल सहित जंगल के बहुत से जानवर और पक्षी गोलू गीदड़ की सालगिरह मनाने आए थे | गोलू आंखे फाड़-फाड़कर उन्हें देख रहा था | उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर इन सबको उसकी सालगिरह की खबर कैसे हुई ? वह हकलाते हुए बोला -‘लेकिन आप सबको मेरी सालगिरह के बारे में पता कैसे लगा ?’

“मैं बताता हूँ !” शेर सिहं अपना गला साफ करते हुए बोले – “दरअसल, जंगल के कंप्यूटर में सभी जानवरों की जन्मतिथि का रिकार्ड मौजूद है | मुझे आज ही कंप्युटर रिकार्ड से तुम्हारी जन्मतिथी की जानकारी मिली | आज न्यू ईयर भी है | बस, मैंने झटपट मोबाइल के ज़रिए सभी जानवरों को तुम्हारे घर उपहार लेकर पहुँचने और सालगिरह मनाने का संदेश दिया |”

बेचारा गोलू कुछ नहीं कह सका | जल्दी ही सालगिरह के साथ-साथ न्यू ईयर सेलिब्रेशन की तैयारियाँ शुरू हो गईं | गोलू ने केक काटा और पीलू ने गुब्बारे फोड़े | सुरीली कोयल ने कई मीठे गीत सुनाए | चिंकू मोर ने शानदार नृत्य दिखाकर खूब मनोरंजन किया | फिर दावत हुई | चंकी लोमड़ी की बनाई पेस्ट्री और मीकू की स्ट्रॅाबेरी सभी ने खूब स्वाद लेकर खाई | गोलू को इतनी खुशी जीवन में पहली बार मिली थी |

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