गज़ब की सहनशक्ति

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न्यूटन का एक पालतू कुत्ता था  – डायमंड | हालाँकि वह बहुत शरारती था , पर न्यूटन का दुलारा था | एक रात डायमंड घर पर अकेला था | न जाने उसे क्या सूझी ! अपने मालिक की स्टडी टेबल के पास पहुँच गया | बहुत देर तक तो उस टेबल के सामने रखी कुर्सी पर बैठा रहा | शायद यह अहसास करना चाह रहा था कि उसके मालिक को उस कुर्सी पर बैठकर  ऐसा क्या आनन्द मिलता है कि वे २४ में से १८ घंटे इसी पर बैठे रहते हैं ! फिर एकाएक वह टेबल पर चढ़ गया |  टेबल पर रखे पन्नों को  शायद पढ़ने की यह कोशिश थी, इसलिए तो उन सबको  पूरी टेबल पर  बेतरतीब ढ़ग से फ़ैला दिया | इसी दौरान उसका पैर टेबल पर रखी जलती हुई मोमबत्ती से जा टकराया | मोमबत्ती के गिरते ही  कागजों ने आग पकड़ ली | डायमंड डरकर वहाँ से भाग गया | पर आग ने अपना काम जारी रखा | उसने टेबल पर पड़े सारे कागजों को जलाकर ही शांति ली |

न्यूटन जब घर लौटे, तो डायमंड को एक कोने में सहमा हुआ  बैठा पाया | प्यार से उन्होंने डायमंड की और देखा और बोले – ‘ अरे, आज मेरा नटखट डायमंड इतना शांत क्यों बैठा है !’   इतने  में उन्हें कुछ जलने की बू आई | वे तुरंत अपने कक्ष में दौड़े | टेबल पर अपने रिसर्च के काग़जों की जगह उनकी राख पाई  | एकबारगी तो दिल धक् सा रह गया | दिल में ऐसा दर्द उठा, जैसे दिल का दौरा पड़ा हो | तभी उनकी नज़र दरवाज़े पर सहमे खड़े डायमंड पर पड़ी | उसकी आँखें माफ़ी की तलब किए थीं |

न्यूटन आगे बढ़े, डायमंड को गोद में उठाया, सहलाया और बोले – ‘जानते हो, आज तुमने क्या किया ?  मैं वर्षों से जिस रिसर्च को लिख रहा था, वह तुमने पलों में जला दी | मेरे इतने वर्षों की मेहनत स्वाहा कर दी | पर कोई बात नहीं, तुमने जानबूझ कर तो ऐसा नहीं किया न ! जाओ, तुम बाहर जाकर खेलो…’   न्यूटन ने अपनी टेबल साफ़ की और फ़िर दोबारा से , नए सिरे से, रिसर्च में लग गए |

क्या है हममें इतना धैर्य, इतनी सहनशीलता ? सफ़ल होने के लिए इन दोनों गुणों की अत्यंत आवश्यकता है, क्योंकि सफ़लता पलक झपकते ही नहीं मिल जाती | बहुत संघर्षों, कठिनाइयों को पार करना पड़ता है | इसलिए धैर्य रखते हुए, सहनशील बनकर ही सफ़लता की सीढ़ियाँ चढ़ी जा सकती है |