एक बहेलिये ( पक्षियों को पकड़ने वाला ) ने एक बड़े से बरगद के वृक्ष के नीचे एक जाल बिछाया पक्षियों को पकड़ने के लिए , क्योंकि उस वृक्ष पर कबूतरों  का एक बड़ा परिवार रहता था | और दाने डालकर उनके जाल में फ़ँसने का इन्तज़ार करने के लिए छिप गया | कबूतरों ने जब देखा कि बहुत सारा दाना नीचे धरती पर बिखरा हुआ है | सभी कबूतरों ने आपस में एक दूसरे से कहा , चलो मित्रो! खाना हमारा इन्त़ार कर  रहा है | उन सबकी बाते सुनकर कबूतरों के राजा चित्रग्रीव ने उन सभी को जानेै रोका, और खतरे का अंदाजा लगाते हुए जाने से मना किया | लेकिन कबूतरों ने राजा चित्रग्रीव की बात सुनकर भी अनसुनी कर दी | और खाने के लिए उड़ गए | कुछ ही देर में सारे कबूतर पहुँच गए खाने के लिए | इनमें कबूतरों का राजा भी था |  बहुत सारे कबूतरों को देखकर बहेलिया बहुत खुश हो गया |

कुछ समय बाद सभी कबूतर जाल में फ़ँस गए | कबूतरों में उनका राजा चित्रग्रीव भी था | दूर से बहेलिए को आता देखकर  चित्रग्रीव ने कहा – “मित्रो ! यह हमारे लिए संकट की घड़ी है | किन्तु हमें घबराना नहीं चाहिए बल्कि मिलकर मुकाबला करना चाहिए | तभी  इस संकट से छुटकारा मिल सकता है |

सभी कबूतर डर से व्याकुल हो रहे थे | उन सभी कबूतरों ने राजा चित्रग्रीव से माफ़ी मांगी, उनकी बात न मानने के लिए | लेकिन राजा चित्रग्रीव ने उन सभी कबूतरों को एक साथ जाल लेकर उड़ जाने का आदेश दिया | सभी को अपनी जान प्यारी थी | इसलिए सभी कबूतर एक साथ मिलकर जाल को उड़ा ले चले | बहेलिया हाथ मलता रह गया | चित्रग्रीव ने सभी कबूतरों को एक दिशा में उड़ने का  आदेश दिया | जाल को लेकर सभी कबूतर उस दिशा में उड़ चले | कुछ देर के बाद चित्रग्रीव ने कबूतरों को एक स्थान पर उतरने का आदेश दिया | सभी कबूतर उस स्थान पर सुरक्षित उतर गए | वह स्थान एक पहाड़ी पर था | अब उनके सामने उस जाल से बाहर निकलने का प्रश्न था | कबूतरों के राजा चित्रग्रीव ने अपने मित्र  चूँ-चूँ चूहे को आवाज लगाकर बुलाया | चूँ-चूँ चूहा जब वहाँ आया, तो उसने अपने मित्र कबूतर चित्रग्रीव और बाकि सब कबूतरों को जाल में फ़से हुए देखा | तो उसने तुरन्त बाकि सब अपने चूहों मित्रों को बुलाया,  और जाल काटकर सबको आज़ाद कर दिया |  अब सभी कबूतरों ने चूहों को धन्यवाद दिया अपनी मदद के लिए | इस प्रकार राजा चित्रग्रीव की सूझबूझ से सभी कबूतर आज़ाद थे |

इस कहानी से शिक्षा मिलती है कि  कुछ भी काम शुरू करने से पहले विचार-विमर्श करना ज़रूरी है |  और एकता में ही शक्ति है | सबसे पहले राजा चित्रग्रीव की सूझबूझ और फ़िर सब कबूतरों के एक साथ उड़ने के कारण ही आज वह सब आज़ाद थे |

Leave a Reply