सभाकक्ष में मंच सजा था | सभी श्रोतागण अपना-अपना स्थन ग्रहण कर चुके थे |  तभी वक्ता महोदय ने कक्ष में प्रवेश किया | किन्तु उनका  अंदाज थोड़ा हट के था | वे हाथ में १000 रूपये का नोट थामे श्रोतागणों को दिखाते हुए मंच पर चढ़े | उन्होंने श्रोताओं का अभिनंदन करते हुए उनसे पूछा – “आपमें से कौन-कौन इस हज़ार के नोट को लेने का इच्छुक है ? धीरे-धीरे हाथ उठने लगे | एक-एक करके लगभग सभी ने हाथ उठा लिए | श्रोतागणों कि प्रतिक्रिया देखकर वे बोले – “अवश्य ! मैं आपमें से एक को  यह नोट दूँगा |  किन्तु इससे पहले मुझे इसके साथ दो-दो हाथ कर लेने दीजिए | ” ऐसा कहते हुए उन्होंने नोट को हाथों से मरोड़ना-मचोड़ना शुरू कर दिया | सभी अचम्भित नज़रों से उन्हें देख रहे थे | देखते-ही-देखते वक्ता महोदय ने उस नोट को मुट्ठी में भींच कर बिल्कुल निचोड़ ही दिया | फ़िर उन्होंने मुचड़ा हुआ नोट दिखाते हुए श्रोतागणों से पुन: प्रश्न किया – ” अब आपमें से कौन-कौन इस नोट को लेना चाहता है ?” इस बार भी धीरे-धीरे सभी ने हाथ उठा लिए | वे बोले – “बहुत अच्छे ! किन्तु यदि मैं इस नट के साथ और भी अभद्र व्यवहार करूँ तो …” ऐसा कहते हुए उन्होंने नोट को जमीन पर रखा और अपने पैर से मसलने लगे | सभी हैरान हुए उन्हें देख रहे थे | पुन: उन्होंने वह रौंदा हुआ नोट उठाया और अपना प्रश्न दोहराया – “क्या अभी भी आपमें से कोई इस पैरों तले रौंदे गए नोट को लेना चाहता है ? ” चूँकि नोट फ़टा नहीं था, इसलिए श्रोतागणों की प्रतिक्रिया में कोई अन्तर नहीं था | लगभग सभी ने उस नोट को लेने हेतु अपनी सहमति दिखाई |

यह देख वक्ता के चेहरे पर नुस्कान फ़ैल गई | वे बोले -“देखा आपने, मैनें इस नोट को बुरी तरह मचोड़ा, पैरों तले रौंदा- किन्तु फिर भी आप सभी इसे लेने को इच्छुक हैं ! क्यों ?  क्योंकि इन सभी परिस्थितयों से गुजरने के पश्चात् भी इस नोट की कीमत कम नहीं हुई | अब भी इसका मूल्य उतना ही है, जितना पहले था – १000 रूपये !”

यह दृष्टांत आपके समक्ष जीवन का महत्व उजागर कर रहा है | आपके साथ भी अनेक बार ऐसा ही होता है | परिस्थितियाँ आपको निचोड़ती हैं, झकझोरती हैं, नीचे गिराकर मिट्टी में रौंदने का प्रयास करती हैं | जीवन बोझिल सा, व्यर्थ प्रतीत होता है | पर याद रखिएगा, आप विशेष हैं – अति विशेष हैं | इन बाहरी चक्रवातों से आपका मूल्य कम नहीं हो सकता | ध्यान की गहराइयों में उतरकर अपने वास्तविक मूल्य को जानिए | इसलिए आज के बाद जब भी आप पर झकझोर देने वाली परिस्थितियाँ, आपका तिरस्कार हावी होने लगे, तो इस हजार के नोट को याद कर लीजिएगा |

यह जीवन ईश्वर का अनमोल उपहार है | यह आपके लिए अवसर है – अपने लक्ष्य को प्राप्त करने का | इसलिए कभी अपने मूल्य को कम मत आँकिएगा | परिस्थितियों के सामने विवश होकर अपने जीवन को अवसाद और निराशा के रसातल में मत धकेल दीजिएगा | सचेत होकर कदम बढ़ाइएगा, ताकि विषम परिस्थितियों में भी गांधीव  छूटे, मंजिल से पहले साहस न छूटे |

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