अनोखा दोस्त

181 views

नन्दन वन में एक छोटा-सा हाथी का बच्चा नंदू अपनी माँ के साथ रहता था | नंदन वन के तालाब का पानी ठंडा और मीठा नंदू को बहुत अच्छा लगता है | वह अक्सर अपनी माँ के साथ वहाँ जाया करता था और अपनी सूंड में पानी भरकर कभी अपनी माँ के ऊपर तो कभी अपने ऊपर डालकर खेला करता | माँ हमेशा उसे ऐसा करने से मना करती, लेकिनणंनू को ऐसे खेलने में बहुत मज़ा आता |

एक दिन नंदू ने देखा कि जहाँ वह खेलते समय पानी छिटकाता था वहाँ एक पौधा निकल आया है | अब नंदू खेलते समय पानी पौधे के ऊपर गिरने नहीं देता, बल्कि उसकी जड़ पर धीरे-धीरे पानी का छिड़काव करता | धीरे-धीरे पौधा पेड़ बन गया, और नंदू भी बच्चे हाथी से बड़ा हाथी बन गया | दोनों में मित्रता हो गई | जब नंदूु उदास होता तो वह अपने दोस्त पेड़ के नीचे घंटों बैठा रहता, और जब खुश होता तो पेड़ के तने को अपनी सूंड में लपेट लेता और खूब
चिघांड़ता | पेड़ भी नंदू का इंतजार करता | कभी फूल बरसाता, तो कभी फल |

नंदू ने एक बार फल चखे, पर स्वाद कसैला होने के कारण उसने थूक दिया | नंदू कीइस हरकत पर पेड़ बहुत हँसा | उसकी डालियाँ बहुत देर तक हिलती रहीं | नंदू अकसर सर्दियों में पेड़ के तने पर शाल लपेट देता, जो उसकी माँ ने दी थी, तो टहनियाँ उसे ऐसे समेट लेती, जैसे कह रही हो, हाँ हमें भी ठंड लगती है | नंदू और पेड़ का रिश्ता इतना मजबूत बन चुका था, वह एक दूसरे के मन की बात समझ लेते हैं | एक बार नंदू बीमार पड़ गया, कमजोरी के कारण वह पेड़ से मिलने कुछ दिनों तक नहीं जा पाया | जब वह ठीक हुआ तो माँ को बताकर वह पेड़ से मिलने गया | लेकिन वहाँ पेड़ दिखाई नहीं दिया | न ही मटमैले फूलों-फलों से लदा उसका दोस्त कहीं दिखाई दिया | वह उदास हो गया | उसके ध्यान से देखने पर उसेएक ठूंठ दिखाई दी | उसके पास जाने पर उसने देखा कि यह तो उसका दोस्त है | नंदू नीचे बैठ गया और अपनी सूंड से ठूंठ को लिपेट लिया, उसकी गरमाहट से उसने अपने दोस्त को पहचान लिया | पेड़ ने सिसकते हुए नंदू को अपनी सारी कहानी बता दी | वह एक चंदन का पेड़ है, रात को उसकी खुशबू सारे जंगल में फैल जाती है | उसकी खुशबूऔर सुंदरता ही उसकी दुश्मन बन गई | रात के अंधेरे में कुछ लोगों ने कुल्हाड़ी से उसका यह हाल कर दिया | सारी बात सुनकर नंदू को बहुत क्रोध आया |

नंदू ने उसे फिर से सींचना शुरू कर दिया | वह कहीं से खाद भी ले आया | बरसात में ठूंठ में से कोंपलें फूटी और कुछ महीनों में वह फ़िर से अपने आकार में आ गया | अब रात को उसकी खुशबू फिर से जंगल में फैलने लगी | कुछ इंसान फ़िर से कुल्हाड़ी लेकर पहुँचे, लेकिन नंदू ने उन्हे पेड़ के पास पहुँचने से पहले ही अपने गुस्से से भगा दिया | नंदू के गुस्से को देखकर उन लोगों ने दोबारा जंगल की तरफ रुख नहीं किया |

नंदू सोचने लगा कि पेड़ इंसान को कितना कुछ देते हैं, लकड़ी, फ़ल, फूल, ताजी हवा, बादल, बरसात, आक्सीजन…! फिर भी इंसान अपने स्वार्थ और लालच के कारण इनको काटने से बाज नहीं आता | क्या वृक्षों और पशु-पक्षियों को जीने का अधिकार नहीं है | इंसान के जैसे पेड़ भी अगर बदला लेने लगे, तो ये दुनिया ही तबाहह्मो जाएगी |

नंदू की सतर्कता के कारण चंदन का पेड़ ही नहीं बल्कि अन्य वृक्ष भी इंसान की भेंट चढ़ने से बच गए | नंदू की सतर्कता के कारण कई पशु-पक्षी बेघर होने से बच गए | चंदन का पेड़ तो ऐसा दोस्त पाकर खुशी से झूमने लगा, क्योंकि उसका दोस्त दुनिया का सबसे अनोखा दोस्त जो है |

Leave a reply

Leave a Reply