अजब सपना – सपना बना हकीकत

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सोनू के पापा ने एक बहुत बड़ा बंगला बनवाया था, जो शहर की आबादी से जरा हटकर था |  यहाँ सोनू का परिवार खुश था, लेकिन सोनू बहुत परेशान था |  उसके परिवार के असपास उसका कोई दोस्त नहीं था |

भोलू सोनू की नौकरानी का बेटा था | वह बंगले के पीछे बने एक छोटे कमरे में अपनी माँ के साथ रहता था |  सोनू की भोलू से दोस्ती हो गई थी | वह उसके साथ कभी-कभी बंगले के सामने खाली मैदान में क्रिकेट खेलता था |  सोनू स्कूल से आने के बाद अच्छी-अच्छी चीज़े खाता रहता |  सेब, संतरा, केले, मिठाइयाँ, पेस्ट्री इत्यादि |   भोलू का मन कभी नहीं ललचाता |  वह जानता था कि उसकी माँ बहुत गरीब है |  उसे ऐसी चीजें खरीदकर खाने के लिए नहीं दे सकती |
एक दिन भोलू ने एक विचित्र सपना देखा |  वह परियों की दुनिया में है | यहाँ पेड़ों पर तरह-तरह की टाॅफियां, चाकलेट और स्वादिष्ट मिठाइयाँ लटकी थीं |  एक मेज़ पर सुन्दर सा बड़ा केक रखा था |   अचानक एक छोटी सी परी सामने आई और बोली -‘ हैप्पी बर्थ डे भोलू !  आज तुम्हारा जन्मदिन है |  केक काटि, हम तुम्हें खिलाएंगे |  देखो, पेड़ों पर कितनी मिठाइयां-चाकलेट लगी हैं |  तुम जितनी चाहो, तोड़ लोऔर खाओ |’ भोलू को तो याद भी नहीं था जि आज उसका जन्मदिन है |  जन्मदिन पर सुबह उसकी माँ उसे गुड़ की एक डली देती थी और बताती थी कि वह आज के दिन पैदा हुआ था |  परियों के बीच खड़ा भोलू इधर-उधर ताकने लगा |  वह सोनू को ढूंढ रहा था, पर वह कहीं नहीं था |  भोलू रोने लगा |  परियों ने उसे बार-बार खाने के लिए का, पर उसने कुछ नहीं खाया | वह बोला -‘ यहाँ मेरा दोस्त सोनू नहीं हैं |  मैं अकेला कैसे खाऊँ ?’

रोते-रोते भोलू का सपना टूट गया, और वह जाग  गया |  उसने देखा, हाथ में गेंद लिए सोनू उसकी कोठरी के दरवाजे पर खड़ा उसे पुकार रहा था -‘भोलू, आज रविवार  है , मुझे स्कूल नहीं जाना है |  चलो, मैदान में चलकर गेंद खेलें |  भोलू बिस्तर से उठकर कोठरी से बाहर आ गया |  उसकी आंखों में आँसू देखकर  सोनू ने टोक दिया -‘अरे ! तुम रो क्यूं रहे हो ?’
भोलू ने सोनू को अपना सपना कह सुनाया |  भोलू का सपना सुनकर सोनू की आंखें भर आईं |  वह बहुत शर्मिंदा हुआ |  वह तो स्वादिष्ट चीज़ें अकेले ही खाया करता था
भोलू को कभी कुछ नहीं देता था |  सोनू दौड़कर अपने घर के भीतर गया और माँ से मांगकर एक बड़ी प्लेट में मिठाइयां और फलले आया |  फिर बोला -‘भोलू, तुम हाथ मुंह धो लो, फिर हम दोनों या फल-मिठाइयाँ खाएंगें |’

अब सोनू कभी फल-मिठाई अकेले नहीं खाता |  भोलू को भी खाने के लिए देता है |  अब सोनू और भोलू और भी पक्के दोस्त बन गए |  सोनू ने अपने पापा से कहा कि वे भोलू को भी किसी स्कूल में दाखिला दिलवा दें, ताकि वह भी पढ़-लिखकर बड़ा आदमी बन सके |  सोनू के पापा इस बात के लिए खुशी-खुशी तैयार हो गए |

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